मैं बहू हूँ, मुझे बहू ही रहने दो ........

मैं बहू हूँ, मुझे बहू ही रहने दो ........

मैं बहू हूँ, मुझे बहू ही रहने दो

​"हमारी बहू तो बेटी जैसी है,"

ये शब्द मेरे अस्तित्व पर प्रहार है

क्या बस तुलना ही मेरी पहचान है

 

नहीं

क्योंकि.....

 

सबका अपना एक वजूद होता है

बेटी का अपना बहु का अपना कर्तव्य होता है,

किसी और के जैसा बनने की चाह में

अस्तित्व अपना ही कमज़ोर होता है।

 

​क्यों 'बहू' होना एक प्रश्नचिह्न है?

क्यों उसे बेटी का प्रमाण चाहिए?

क्या बहू की अपनी कोई पहचान नहीं,

जो उसे किसी और का सम्मान चाहिए?

 

​बेटी तो उस घर में जन्मी है

बहू अपना बचपन कहीं पीछे छोड़ आई है,

वो पराये घर से आकर अपना सब वार देती है

फिर क्यों दुनियां उसने किसी और की परछाई ढूंढती है।

 

​मैं किसी के जैसी क्यों बनूँ ?

मैं स्वयं में ही सम्पूर्ण और खास हूँ,

मैं बेटी थी किसी और की कल तक

आज इस घर का नया और प्यारा विश्वास हूँ।

 

​मुझे बेटी जैसा प्यार मत देना

बस बहू का मान और सम्मान देना,

मेरी कमियों पर हँसना मत कभी,

बस मेरे संघर्षों को अपनी पहचान देना।

 

क्योंकि आपकी हँसी आपका तंज मेरे माता पिता का अपमान करती है।

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— Topic Ends Here —

📅 Posted on: 01 Mar 2026

Mayank Shrivastava

Independent Hindi Poet

Mayank Shrivastava beautifully expresses love, emotions, and the realities of life through his poetry. His writing reflects a rare blend of simplicity and depth, creating a meaningful and lasting impact on readers.

✔ GYAAN DRISHTI

Comments

Dhirendra kumar Rai 02 Mar 2026, 11:09 AM
बहू घर में आई नई उम्मीद है,
उसे पराया नहीं, अवसर समझो।
उसके सपनों को मत रोको,
उसे उड़ान दो, पहचान दो।
जहाँ बहू मुस्कुराती है,
वहीं घर सच में बसता है।
मयंक श्रीवास्तव 03 Mar 2026, 12:21 PM
बहुत सही बात 🙏🙏
Bhawna Pandey 01 Mar 2026, 08:34 PM
यह कविता एक बहू की भावनाओं और उसकी पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति है। अक्सर हम अनजाने में रिश्तों की तुलना कर देते हैं, लेकिन इस रचना में यही सवाल उठता है – क्या हर व्यक्ति अपनी अलग पहचान और सम्मान पाने का हक़दार नहीं है?
इस कविता में शब्दों की सादगी और भावनाओं की गहराई इसे बेहद प्रभावशाली बनाती है। यह न सिर्फ बहुओं के लिए, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो अपने अस्तित्व और स्वाभिमान के लिए खड़ा होता है।
हमारा संदेश है: तुलना नहीं, सम्मान दें। ❤️
मयंक श्रीवास्तव 01 Mar 2026, 10:03 PM
मेरे साधारण शब्दों के भीतर भलीभांति अर्थ समझ कर उसका सकारात्मक विश्लेषण करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
Dwivedi Ramesh 01 Mar 2026, 05:31 PM
हर रिश्ते में कभी-कभी गलतफहमियां हो जाती हैं, लेकिन समझदार बहू वही होती है जो गुस्से में भी संयम रखती है, बहस से बचती है और मीठे शब्दों से माहौल को हल्का करती है. सास के साथ रिश्ते को संभालने के लिए बोलचाल की भाषा का बड़ा महत्व होता है. जब आप नरमी से बात करती हैं, तो आपकी सास न सिर्फ प्रभावित होती हैं, बल्कि धीरे-धीरे आपको अपनी बेटी जैसा मानने लगती हैं. याद रखिए प्यार भरे शब्द कई रिश्तों की उम्र बढ़ा देते
मयंक श्रीवास्तव 01 Mar 2026, 06:45 PM
अति उत्तम