महिला दिवस का सच: नारी सम्मान सिर्फ एक दिन नहीं, हर दिन होना चाहिए

महिला दिवस का सच: नारी सम्मान सिर्फ एक दिन नहीं, हर दिन होना चाहिए

Poetry:

उत्सव बड़ा चहूं ओर हुआ , महिला दिवस अपार
घर में नारी रोज़ ही सहती, झिझक का भारी भार  ॥

मंच सजे, भाषण चले उठी ताली की झंकार 
रसोई तक ही फिर क्यों समझे, नारी का अधिकार ॥

फूल दिए इक दिन मगर, बाकी दिन उपहास 
सम्मान उसे तब मिले, जब मिले अपनों का विश्वास ॥

माँ की ममता रोज़ है, बहना करे रोज दुलार
जीवन सजे पत्नी से, जो करे आंगन को उजियार ॥

सुख-दुख में जो साथ दे, त्यागे अपना मान
उस नारी के श्रम बिना, सूना हर सम्मान ॥

दिन विशेष से क्या मिले, यदि बदले न विचार
मन में हो आदर सदा, यही सच्चा प्यार ॥

कंधे से कंधा मिला,संकल्प को बनाती बलवान
नारी से ही श्रृष्टि की संरचना,यही बनाए वंश वृक्ष महान ॥

सम्मानित वह तब बने, जब हो अधिकार
बेटी, बहन, माँ,पत्नी  सभी जीवन का आधार ॥

नारी केवल रूप नहीं, शक्ति, धैर्य, विचार
इनके चरणों से ही संपूर्ण है जीवन का हर श्रृंगार ॥

जोर-शोर से क्या मिला, यदि बदले न व्यवहार
शक्ति का सम्मान ही, शिव का है सत्कार ॥

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📅 Posted on: 12 Mar 2026

Mayank Shrivastava

Independent Hindi Poet

Mayank Shrivastava beautifully expresses love, emotions, and the realities of life through his poetry. His writing reflects a rare blend of simplicity and depth, creating a meaningful and lasting impact on readers.

✔ GYAAN DRISHTI

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