अहम और रिश्तों की दूरी

अहम और रिश्तों की दूरी

जो भीतर है तेरे वो तेरा
लहज़ा बयाँ करता है ।
लाख चाहु घर ,घर ही रहे
तू लकीरे खींच उसे फिर मकाँ करता है ।।

बोल दे जो है तेरे जहन मे
क्यो बार - बार नजरें चुराता है ।
क़रीब रहकर अजनबी बना हुआ है
क्यो बेवजह खुद के दिल को परेशान करता है ।।

रिश्ता है कहने से नही टूटते
रूठने से भी साथ नही छूट ते ।
ख्याल रखना बस दस्तूर ही न रहे दरमियाँ
अहम ही रिश्तो को शमशान करता है ।।

गुस्ताखियाँ तो सब के खाते में है
क्यो तू इसका अपनो से हिसाब करता है।
अपनो को अपना ही रहने दे
क्यो गैरो सा उनसे सलूक करता है ।।

न चेहरे की उमर है न चतुराई की
फिर किस बात का है गुरुर तुझे।
कम पड़ जाते है लम्हे मोहब्बत के लिये
फिर क्यो तू नफ़रत से अपनो को हैरान करता है ।।

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— Topic Ends Here —

📅 Posted on: 07 Mar 2026

Mayank Shrivastava

Independent Hindi Poet

Mayank Shrivastava beautifully expresses love, emotions, and the realities of life through his poetry. His writing reflects a rare blend of simplicity and depth, creating a meaningful and lasting impact on readers.

✔ GYAAN DRISHTI

Comments

Ankit Tiwari 09 Mar 2026, 09:30 PM
Nice sir ji